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समस्तीपुर: तीन महीने से बंद मुक्तापुर जूट मिल, सैकड़ों मजदूरों पर टूटा रोजी-रोटी का संकट

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समस्तीपुर जिले की एकमात्र औद्योगिक पहचान मानी जाने वाली मुक्तापुर जूट मिल फैक्ट्री पिछले लगभग तीन महीनों से पूरी तरह बंद पड़ी है. फैक्ट्री में कामकाज ठप होने से सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं और उनके सामने परिवार चलाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. परेशान मजदूर अब सरकार और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं.

दिहाड़ी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित

फैक्ट्री बंद होने का सबसे बुरा असर उन दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है, जो लोडिंग-अनलोडिंग, पैकिंग और अन्य अस्थायी कामों पर निर्भर थे. मजदूरों का कहना है कि उनकी आमदनी में 50 से 75 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है. कई परिवार ऐसे हैं जिनका पूरा घर इसी फैक्ट्री की कमाई से चलता था. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि रोजमर्रा के खर्च पूरे करना भी मुश्किल हो रहा है.

पलायन की बढ़ती मजबूरी

मजदूरों का साफ कहना है कि अगर जल्द फैक्ट्री दोबारा चालू नहीं हुई तो उनके पास दूसरे राज्यों में पलायन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा. उनका आरोप है कि एक तरफ सरकार बिहार से पलायन रोकने की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसी नीतियां और परिस्थितियां बन रही हैं, जिनसे चल रहे उद्योग ही बंद हो जा रहे हैं.

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी चोट

जूट मिल के बंद होने से केवल मजदूर ही नहीं, बल्कि आसपास के छोटे दुकानदार, ट्रांसपोर्टर और ठेकेदार भी प्रभावित हुए हैं. इलाके की आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ गई हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैक्ट्री समस्तीपुर के लिए रोजगार का बड़ा सहारा थी, लेकिन आज वही सहारा टूटता नजर आ रहा है.

सरकार से दखल की मांग

मजदूर संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने सरकार से अपील की है कि मामले में हस्तक्षेप कर जूट मिल को जल्द से जल्द चालू कराया जाए. उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सैकड़ों परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे.

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